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नरेंद्र मोदी के नाम- एक खुला पत्र

नरेंद्र मोदी के नाम- एक खुला पत्र

आपकी एक बात जिससे कोई इनकार नही कर सकता वो यह है कि आप जहाँ-जहाँ गए, उस-उस जगह से अपने पूर्व जन्म या पूर्व जीवन का कोई पुराना नाता जोड़ लिया या फिर जिस-जिस वोट बैंक को भुनाना चाहा, तो उनके इतिहास में घुसकर जबरन उनके संघर्षरत नेता या उद्वारक को अपना आदर्श बना लिया.

महात्मा गांधी हो या शहीद भगत सिंघ, बल्लभ भाई पटेल हो या अब बाबा साहेब अम्बेडकर, आपको जब जिसका नाम, जिसकी छवि अपने चुनावी प्रचार में आवश्यक प्रतीत हुई, आपने उनके नाम, उनके संघर्ष, उनकी मान्यताओं के जमकर गुण गाए. लेकिन ऐसा करते हुए आप यह भूल गए कि जनता की याददाश्त में बातें भुलाई नहीं जाती.

बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जन्मस्थली से माननीय प्रधानमत्री जी, आपने बाबा साहेब द्वारा लड़े समानता को लेकर संघर्ष की बात की, दलित उत्थान के लिए लड़ी लड़ाई की बातें कहीं.

मोदी जी, आपने कई अच्छी बातें कही, लेकिन इस मौके पर मुझे आपको कुछ ऐसी बातें याद दिलानी हैं, जिन्हें आप मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के दौर में भूल गए हैं. लेकिन जनता मन के किसी कोने में उस व्यक्ति और आज के नरेन्द्र मोदी के दोहरे चरित्र को भली-भांति देख और समझ पा रही है.

मोदी जी, 2010 में गुजरात के अहमदाबाद में सामाजिक समरसता के मुद्दे पर लिखी किसी किताब का विमोचन करते हुए आपने कहा था कि भीमराव अम्बेडकर कोई क्रांतिकारी नहीं थे. आप यही नहीं रुके और अपनी बात जारी रखते हुए बोले कि “दलित किसी मंदबुद्धि बच्चे की तरह होते हैं”. यह कोई पहली या आखिरी बार नहीं था जब आप या भाजपा से जुड़े अन्य नेताओं ने दलितों का अपमान करते हुए ऐसी टिपण्णी की. मोदी सरकार के केन्द्रीय मंत्री वी.के. सिंह ने फरीदाबाद में दलित परिवार के मासूम बच्चों के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर टिपण्णी करते हुए उनकी तुलना सड़क पर मरने वाले कुत्ते से की थी .

एन.सी.आर.बी की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार आपकी सरकार के सत्ता में आने के बाद दलितों के खिलाफ हिंसा और अपराध में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल राजस्थान के नागौर में १७ दलितों को ट्रक से बांध कर घसीटा गया, जिनमे से ४ की मौत हो गई और अन्य की हालत काफी गंभीर रही. अभी हाल की घटना पर ध्यान दें, तो उसी नागौर जिले में ३ दलित किशोरों को चोरी के आरोप में निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीटागया. इन अमानवीय घटनाओं पर सख्त कार्यवाई करने से मोदी जी को किसने रोका हुआ है?

दरअसल ऊपरी सज्जा-सजावट की यही दिक्कत है, उसका दिखावा ज्यादा देर नही टिक पाता. मोदी जी, आप जिस मुंह से बाबा साहेब की बात करते हैं? उसी सिर से आप सावरकर की मूर्ति के आगे नमन करते हैं. सावरकर की पाठशाला, आर. एस. एस. और उनके सिद्धांत धुर दलित विरोधी रहे हैं. इसी विरासत को अब भाजपा प्रधान अपने कंधो पर आगे ले जा रहे हैं. जिस अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ अम्बेडकर जीवन भर संघर्ष करते रहे, आर. एस. एस. उसी की नींव पर खड़ा है .

रोहित वेमुला के संग मोदी सरकार के बर्ताव और अत्याचार को कैसे भूला जा सकता है? रोहित के पैरों में ताले लगाकर, उसे सड़क पर सुलाकर, उसकी छात्रवृत्ति को रोककर आर्थिक संकट पैदा करने की मोदी जी के मंत्रियों द्वारा की गई शर्मनाक हरकत ने उसके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई. उसे अतिवादी और देशद्रोही नाम दिया गया. रोहित का क्या अपराध था? सिर्फ यही न कि वह दलित होकर भी खून-पसीना एक करते अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहा था?

बाबा साहेब के सपनों के भारत को न मानने वाले नरेंद्र मोदी बाबा साहेब को मानने का ढोंग रचाते हुए भूल गए कि सत्ता में आने के बाद राज्यों के दलित और आदिवासी उत्थान बजट में 57 प्रतिशत की कटौती करते हुए 50,548 करोड़ से घटाकर 30,850 करोड़ रूपये कर दिया.

बाबा साहेब दलितों को मुख्यधारा में लाना चाहते थे और वो सामाजिक समानता के साथ ही मुमकिन था और सामाजिक समानता सिर्फ और सिर्फ आधुनिक उच्च शिक्षा से ही मुमकिन होती. लेकिन मोदी सरकार बाबा साहेब के इसी सपने के खिलाफ मजबूती से खडी हुई और एस.सी./एस.टी. छात्रवृति योजना बजट 305.78 करोड़ कम कर दिया. क्या इसी “समानता” की बात कर रहे थे मोदी जी?

नरेन्द्र मोदी जी आपकी और बाबा साहेब की सोच में इतना ही फर्क है जितना आर. एस. एस. और महात्मा गांधी की सोच में था. बाबा साहेब कानून व्यवस्था को राजनीति सुधारने का साधन मानते थे जबकि मोदी जी संविधान-कानून को अपनी ढाल बनाते हैं. मत बात करिए समानता की, मोदी जी ! दुःख होता है.

बाबा साहेब धर्म की अतिवादी और भेदभाव वाली प्रकृति के खिलाफ थे, जबकि मोदी जी जहाँ आर.एस.एस. से पढ़े हैं, वहां धर्म का यही स्वरुप पढाया और समझाया जाता है. मोदी जी, बाबा साहेब को पढ़कर देखिये, उन्हें जीवन में उतारने के लिए आपको अपना आर.एस.एस. का चोला उतारना होगा. माननीय मोदी जी, जैसे जनता को दिखाते हैं, वैसे ही बस एक बार आर.एस.एस. को ऊँगली दिखाकर बता दीजिये की आप सावरकर के शिष्य नहीं. बाबा साहेब उस दौर में भारतीय होने और भारतीयता पर गर्व करते थे, जबकि मोदी जी विदेश में जाकर भारतीय होने पर शर्मिंदा थे. मोदी जी आप क्यों भारत को अपने हितों के लिए धर्म, सम्प्रदाय में बांटे रखना चाहते हैं, जबकि बाबा साहेब ऐसे किसी भी बंटवारे के खिलाफ थे, बाबा साहेब दलितों को संविधान के आधार पर उन्नत करना चाहते थे और मोदी मनुस्मृति के बल पर उन्हें दबाना चाहते हैं.”


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