close
देश क़तार में है

देश क़तार में है

देश कतार में है. इस देश का किसान कतार में है. पूर्व सैनिक OROP की कतार में हैं. नजीब की माँ नजीब को पाने के लिए कतार में हैं, बंसल परिवार की आत्महत्या या (हत्या) के लिए परिवार की आत्मा कतार में हैं, रोहित वेमुला की माँ भी न्याय की उम्मीद में क़तार में हैं और पूरा देश, पिछले एक हफ्ते से मौत का तांडव देखते हुए पैसे पाने के लिए बैंक की क़तार में है. देश कतार में है. इस देश का किसान कतार में है. इस देश का मजदूर कतार में है. बड़े बूढ़े कतार में है. महिलाए कतार में हैं. छोटे छोटे दुकानों के मालिक कतार में है. अस्पतालों के बाहर मरीज़ कतार में है. और इसी बीच एसबीआई ने 63 डिफ़ॉल्टर्स के 48000 करोड़ रुपए के लोन माफ़ कर दिए हैं. नोटबंदी के बाद 11 दिन के भीतर मरने वालों की संख्या 90 के पार जा रही है (इस लेख के लिखे जाने तक).. जी हाँ ये 90 वहीँ हैं जिनका ब्योरा प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में दिया था. ये वहीँ लोग हैं जो इतना काला धन रखकर बैठे हैं कि जिससे देश का दिवालिया निकल गया है. ये वहीँ है जिन्हें नोटबंदी के बाद से नींद आनी बंद हो गई है. जिन पर मोदी जी जापान से लेकर भारत तक हँसे थे. पर आखिर ये लोग कौन है? ये 90 लोग (मरने वालों की संख्या रोज़ाना बढ़ती जा रही है) जो नोटबंदी से इतने घबरा गए कि जान ही चली गयी.. इनमे से एक नवजात था, जो अस्पताल के पुराने नोट न लेने पर माँ के पेट में ही दम तोड़ गया. एक महिला बीमार पति के इलाज़ की खातिर नोट बदलवाने ३ दिन तक एटीएम की लाइन में लगी और आखिर में निराश होकर अपनी जान दे दी, एक पूर्व सैनिक की कतार में लगे ही मौत हो गयी, गाज़ियाबाद में २ बच्चों को अस्पताल में नोट न चलने के कारण जान देनी पड़ी, एक किसान बीज नही बो पाया और जान चली गयी, एक बैंक कर्मी की काम के दवाब में जान चली गयी, एक रेप पीडिता बच्ची को इलाज न मिल पाने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी, एक पिता जिसकी बेटी की शादी थी, पुराने नोट बंद होने के सदमे को झेल नहीं सके. ऐसे ही कुल मिलाकर 90 लोग जिनमे किसान, मासूम बच्चे, अजन्मे बच्चे, गरीब महिला, मजदूर, पूर्व सैनिक, बीमार लोग सरकार की इस नोटबंदी के भेंट चढ़ गए.

ये वही लोग हैं, जिनका मखौल बनाकर मोदी जी ने कहा था कि घर में शादी है और पैसे नही है. बैंकों के बाहर की कतार में देश है, लेकिन विजय मालया, अडानी, अम्बानी बंधू, प्रधानमंत्री जी, केन्द्रीय मंत्रिमंडल, अनर्थशास्त्री जेटली, भाजपा सांसद कोई भी दिखाई नहीं पड़ रहा? कतार में हैं वो किसान जिसे अपने खेत में बीज बोना था, लेकिन पुराने नोट मिटटी बन गए. कतार में हैं वो मजदूर जिसे देहाड़ी कमाने को काम करना था, लेकिन बैंकों की लाइन में लगे लगे बच्चे भूखे सो गए. बैंक की कतार में हैं वो मजबूर परिजन जिनके अपने अस्पताल में भर्ती के इंतज़ार ने दम तोड़ रहे हैं. ये वही लोग हैं जिनकी रातों की नींद उड़ाकर मोदी जी ठहाके लगा रहे हैं.

हमारा पूरा हौसला कतार में है. कतारें बढ़ गयी हैं. क्यूंकि पिछली कतार कम नही हुई.. नजीब की माँ इन्साफ की आस में अभी भी वहीँ बनी हुई है. रामकिशन की मौत का कारण बनी सरकारी ढीढता अभी भी कतार में है. बंसल परिवार की आत्मा अब भी इन्साफ की गुहार में कतार में बने हुए हैं, रोहित वेमुला की मजबूर मौत अपने जैसे अन्य कई छात्रों के जीवन के लिए इन्साफ मांगने कतार में है, और अब 90 अकस्मात् और सरकारी तंत्र की भेंट चढ़ी मासूम जिंदगियां एक सवाल लिए कतार में है कि आखिर क्यों इस अपरिपक्व सरकारी योजना के परमाणु प्रहार सिर्फ आम और गरीब जनता पर हुए? क्यों उन्हें बचाया नहीं जा सका? आखिर क्यों सत्ता से लेकर सत्ता प्रेमी बने देशभक्त मौत पर मातम तो दूर एक बार सान्तवना भी नहीं देते? ये कैसा राष्ट्रवाद है जहां राष्ट्र की जनता की लाशों पर सरकार अपने हवाई किले बना रही है. सवाल कई है लेकिन जवाब मिलने से पहले ही जवाब बंदी का बोर्ड टांग दिया जाता है. क्या लोकतंत्र भी काम नही कर रहा? और अब जबकि मोदी जी के बड़े बड़े उद्योगपतियों से लेन देन के रिश्तों का सच, सबूत के साथ सामने आ चुका है, और नोटबंदी महज़ 8 लाख करोड़ का आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला जान पड़ता है, इस घोटाले की ख़िलाफ़त ना करना देशद्रोह होगा. इस तथाकथित 8 लाख करोड़ रुपए के घोटाले की जाँच की माँग ना करना देशद्रोह होगा, विदेशों से कालाधन लाने की माँग ना करना देशद्रोह होगा, लाखों करोड़ रुपए के बैंक लोन गटक चुके बड़े औद्योगिक घराओं से जनता का, देश का पैसा वसूलने की माँग ना करना देशद्रोह होगा. और हाँ, लाइन में खड़ा होना आपको देशभक्त बिलकुल नहीं बनाता. जय हिंद!


COMMENTS ARE OFF THIS POST

INSTAGRAM FEED

Follow on Instagram