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गहने खुले में नहीं रखते हम, क्योंकि वो कीमती हैं, फिर बच्चे क्यों?

रेयान इंटरनेशनल स्कूल में जो सब हुआ, उसे सुनकर मेरे अंदर वही उथल पुथल हुई जो हर एक पिता में मन में हुई होगी। मैंने अपने दोनो बच्चों को गौर से देखा और उनकी चिंता में मानो घुल सा गया। प्रद्युम्न के माता पिता किस हाल में होंगे, कल्पना करना भी मुश्किल है। आखिर कैसा समाज बना दिया है हमने? किस तरह के समाज में रह रहे हैं हम लोग। बच्चे के माथे पर सहलाकर जब हम उन्हें सुबह स्कूल के लिए जगाते हैं, तो क्या सोचते हैं? मैं सोचता हूँ कि घर के सुरक्षा कवच से निकालकर मैं..

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