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प्रधान सेवक जी! आखिर हमारा क़सूर क्या है?

पेट्रोल-डीजल में आग लगी है। ये आग केंद्र में बैठी सरकार की लगाई हुई है और इसमें जल रहा है आम आदमी का सुख चैन। लेकिन जनता के इस दुख से मोदी सरकार की बाछें खिली हुई हैं। इस खुशी में मोदी सरकार के नवरत्न नेताओं के मुख से ऐसे ऐसे बोल फूट रहे हैं कि क्या कहें! मोदी जी के पर्यटन मंत्री के.जे. अल्फ़ोंस का कहना है कि पेट्रोल खरीदने वाले भूखे नहीं मर रहे, सरकार ने सोच समझकर टैक्स लगाया है। यानी आपने अपने खून पसीने की कमाई से यदि स्कूटर भी खरीद लिया तो इस सरकार..

गहने खुले में नहीं रखते हम, क्योंकि वो कीमती हैं, फिर बच्चे क्यों?

रेयान इंटरनेशनल स्कूल में जो सब हुआ, उसे सुनकर मेरे अंदर वही उथल पुथल हुई जो हर एक पिता में मन में हुई होगी। मैंने अपने दोनो बच्चों को गौर से देखा और उनकी चिंता में मानो घुल सा गया। प्रद्युम्न के माता पिता किस हाल में होंगे, कल्पना करना भी मुश्किल है। आखिर कैसा समाज बना दिया है हमने? किस तरह के समाज में रह रहे हैं हम लोग। बच्चे के माथे पर सहलाकर जब हम उन्हें सुबह स्कूल के लिए जगाते हैं, तो क्या सोचते हैं? मैं सोचता हूँ कि घर के सुरक्षा कवच से निकालकर मैं..

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